Poetry

नहीं सकते

064-mustsee-digital-art-elena-dudinaतुझे पा भी नहीं सकते
तुझे जान भी नहीं सकते
तेरे लिए इन साँसों को
रुका भी नहीं सकते
फिर भी कमबख्त
कोई साँस
रूक ही जाती है
तेरे नाम पे |

तेरे लिए रो भी नहीं सकते
तेरे लिए हँस भी नहीं सकते
तेरे लिए इस दिल को
धड़का भी नहीं सकते
फिर भी कमबख्त
कोई धड़कन
धड़क ही जाती है
तेरे दीदार पे |

तुझे टूट कर
चाह भी नहीं सकते
तुझे उस रब से
मांग भी नहीं सकते
फिर भी कमबख्त
सजदे-ए-दुआ मे कोई
फरियाद आ ही जाती है
तेरे अहसास पे |

Advertisements
Poetry

भूल गयी मै

8fe93577164d2c40736398b242f30d14

भूल गयी मै
उस चाहत को
उस इबादत को
भूल गयी मै
उस तड़प को
उस कशिश को
भूल गयी मै
हां भूल गयी
उस मदहोशी को
उस ख़ामोशी को
तेरे आने का एहसास
तेरे मुलाकात
का इंतजार
भूल गयी मै
हां भूल गयी

Poetry

लिखे है मैंने

let-goकुछ लम्हें
कुछ पल
कुछ अहसास
लिखे है मैंने,

तेरे आँखों मे पढ़ी
किस्सो के कहानी
लिखी है मैंने,

तेरे हंसी की झंकार
से हुई दिल की कशिश
लिखी है मैंने,

लिखी है वो रात
लिखी है वो बहार
लिखे है तेरे मेरे
दिल के जज्बात,

लिखे है मैंने
लिखे है मैंने

Poetry

तू नहीं तो तेरे याद सही

la_con10कोई पल कोई दिन ऐसा नहीं
जब तेरे लिए सोचा नहीं
जिस दिन तेरा दीदार नहीं
उस दिन नींद दुश्वार नहीं|

तू साथ नहीं तेरा नाम सही
तेरे दीदार का हर पल इंतजार सही
हम होश मे नहीं ऐसे बदहाल सही
बिन पिंजरे की तेरी कैद सही|

कोई ख्वाब अब तेरे बिन साथ नहीं
तेरे आने की आहट पर मदहाल सही
तू नहीं तो तेरे याद सही|
तू नहीं तो तेरे याद सही|

Poetry

तन्हाईया

dangerous-loneliness

तन्हाइयों से अब
दोस्ती हो सी गयी,
दोस्ती अब ये ओर भी
गहरी हो गयी,
सीख लिया हमने
तन्हा रहना भी,
तन्हाइयों की दुनिया से अब
अलग सी यारी हो गयी,
जो अपने है उन से
मैं बेगानी सी हो गयी,
बेगानों मे अपनों की
कहानी सी हो गयी,
निकलती है इस फलक पर
धुप आज भी,
पर अंधेरो से हमारी
पहचान पुरानी सी हो गयी|

Continue reading “तन्हाईया”

Poetry

तुझे जो देखा इतने करीब से

तुझे जो देखा
इतने करीब से
लगा की जैसी
साँसे थम गयी।

अचानक रूबरू
हुई जो तुझसे
लगा की जैसे
धड़कन बढ़ गयी।

सुना जो मेरा नाम
तेरे जुबान से
लगा की जैसे
लहू जम गयी।

तुने जो बढ़ाया हाथ
एक मुबारक देने
लगा के जैसे
कायनात बदल गयी।

Poetry

दर्द-ए-दिल की दस्ता

क्या बताये तुझे, इस दर्द-ए-दिल की दास्तां,
क्या बताये तुझे, इस दर्द-ए-दिल की दास्तां|
तू है वहाँ, हम न पहुँच सके जहाँ||

ताकती रहे ये नीगाहें, उस द्वार को उस राह को,
ताकती रहे ये नीगाहें, उस द्वार को उस राह को|
और तू ऐसे आये, और यूँ चला जाये||

क्या बताये तुझे, उस इंतज़ार-ए-आलम का नशा,
क्या बताये तुझे, उस इंतज़ार-ए-आलम का नशा|
तेरी एक झलक ही, क्या असर कर जाये||

हँसती रहे ये निगाहें, मेरे इस हाल पे इस बात पे,
हँसती रहे ये निगाहें, मेरे इस हाल पे इस बात पे|
और तू मेरे ये  मदहोशी, कभी जान ही न पाये||

क्या बताये तुझे, इस दर्द-ए-दिल की दास्तां,
क्या बताये तुझे, इस दर्द-ए-दिल की दास्तां|
तू है वहाँ, हम न पहुँच सके जहाँ||

Poetry

आज भी

चिलमन से वो
अाज भी छाक जाती है
उसके नाम से आँखे
आज भी नम हो जाती है
एक तिरझी मुस्कान से
किस्मत मुझे छेड़ जाती है
उसके नाम पे धड़कन
अाज भी थम जाती है
उसके नाम पे धड़कन
आज भी थम जाती है
उसकी बेवफाईयाँ ही अब
वफा कर जाती है
उस के नाम पर
आज भी साँसे रूक जाती है

Poetry

जुदा सा ये जहाँ

जुदा सा ये जहाँ
जुदा जुदा सी हर दिशा।
गुम है ये जुस्सत्जु
गुम गुम सा तेरा नशा।
सुना सा ये दिल
सुना सुना सारा मकां।
प्यासी है जमी
प्यासा प्यासा आशमा॥
खफा हुए जो तुम
खफा खफा सा ये शमा॥

Poetry

जिंदगी की इस घुप में

जिंदगी की इस घुप में
मैं  प्यासी रह गयी
दुनिया की दौड में
जैसे मैं पीछे रह गयी
सब कितने आगे और मैं
कितने पिछे रह गई
कोई मन में कोई धन में
मुझसे ऊपर निकल गये
छोटे भी अब उच्चें लगने लगे
बेबसी तो किस्से लगने लगे
कुछ प्यार तो बक्सा रब ने
पर कुछ तो उस में भी
पार निकल गये

Poetry

हमने कुछ खोया न होता

खुश वो भी थे
खुश हम भी थे
जब दिन वो हसीन थे
दिल हमने था लगाया
उसने दामन अपना बचाया
खुश वो आज भी हो शायद
खुश हम भी है शायद
पर ये शायद, शायद न होता
जो तुने यु मुहँ फेरा न होता
क्या मिला तुझे हमे लुट के
शायद तुझसे जुदा होकर
हमने कुछ खोया न होता।

Poetry

फुर्सत के दो पल

फुर्स्त के दो पल कुछ यूँ मिले
के एक पल मे ही गुजर दिये
सपने जो देखे मैनें
तेरी पलको मे सजा दिये
आज कुछ नगमे लिखे मैनें
जो तुझे आँखो से ही सुना दिये
जुस्तजु जो कैद थी इस सीने में
तुने अपने सीने में समा लिए
छलक उठे आँखो से कैद दरीया
और तूने उनहें भी मोती बना दिये
हमने फलक  पर तारे देखने की तमन्ना की
तूने अपने चाँद को देखने की गुजारिश की
बस फुर्सत के दो पल कुछ यूँ ही गुजार दिये।

Poetry

लम्हे

हर लम्हा नया रस लाता
जीवन का नया ही ताल सुनाता
जीवन में कितने रंग बिखरे
अहसास करा जाता
पर कुछ लम्हे निरस से रह जाते
कुछ अहसास नही होता
सब पास हो कर भी
कुछ पास नही होता
दोस्तो के बीच भी
तन्हाई घेर जाती है तब
दोस्त भी बेगाने और
दुश्मन भी अनजाने
नजर आते है तब।

Poetry

वो रिश्तें

जिन रिश्तों में
दिल का ख्वाब था
जिन्हें पाला-पोसा
सिचां हमने
वो आज बड़े हो
खुद चलने लगे है
सब कुछ
सिखाया था हमने
पीछे मुड़ने के सिवा
वो हमे आज
पिछे छोड़ चले है

Poetry

रिश्ते

कुछ अनजाने से रिश्ते
कुछ पहचाने
कुछ अजनबी से लगे
समय के मेल से बने
पता नही कब तक
मन मे बसे रहे
पेड़ के सुखे पत्ते से
पत्तो से हल्के
पर पत्तर से भारी लगे
पेड़ जुदा करना चाहे
पर कर न पाऐ
किसी छोकें के इन्तजार में
आसमा को तकता रहे।