Poetry

होती नही बारीशे

बहुतो ने कि खुहासे
बहुतो ने कि फरमाइशें
क्या पता किसे मिल जाए
हमारी चाहते
जाने कब हो जाये
प्यार कि बारीशे |
सोते रहे जाग कर भी
हँसते रहे सब जान कर भी,
हमे मिला इसका सिला
तालाब अब ये सुखा पड़ा
यहाँ होती नही बारीशे
मोर के नाचने कि फरमाइशें।

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1 thought on “होती नही बारीशे”

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