Poetry

जहां

गुम-गुम सा
सुन-सुन सा
सारा जहां लगता है
अब बेगाना-सा
ये घर संसार लगता है
बाजारो की भीड़ मे घुटता
ये इंसान लगता है
अब तो अपना
भी पराया लगता है
खो जाने वाली भीड़ मे
तन्हां-सा मकान लगता है
बन्दिशो मे बन्धा है  जहां
उस कुँए से
छोटा-सा आसमा लगता है
गुम है यहाँ सारी दिशाएं
गोल-सा सारा जहां लगता है
प्यार के इन्तजार मे
प्यासा सारा जहां लगता है
घुँआ-ही-धुँआ है यहाँ
मौत का ताडंव लगता है
मौत भी क्या मौत दे
जिन्दा लाशो का ढेर लगता है
चाबी  भरकर चलता-सा
ये पुरा जहां लगता है।

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गुन्हा

ये उनका गुन्हा था
या हम ही कुछ
ऐसा कर बैठे।
अनजानी राहों पर जो
खुद को ले जाने पर
मजबूर कर बैठे।
हर पल की ताबीर
को साथ लेकर
एक तस्वीर तो
बना ली हमने।
पर उस को जहां के सामने
नुमाइस कर गुन्हा कर बैठे।
और इस दौर-ऐ- तिजारत में
खुद को ही गवा बैठे।

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लम्हे

हर लम्हा नया रस लाता
जीवन का नया ही ताल सुनाता
जीवन में कितने रंग बिखरे
अहसास करा जाता
पर कुछ लम्हे निरस से रह जाते
कुछ अहसास नही होता
सब पास हो कर भी
कुछ पास नही होता
दोस्तो के बीच भी
तन्हाई घेर जाती है तब
दोस्त भी बेगाने और
दुश्मन भी अनजाने
नजर आते है तब।

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वो रिश्तें

जिन रिश्तों में
दिल का ख्वाब था
जिन्हें पाला-पोसा
सिचां हमने
वो आज बड़े हो
खुद चलने लगे है
सब कुछ
सिखाया था हमने
पीछे मुड़ने के सिवा
वो हमे आज
पिछे छोड़ चले है

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रिश्ते

कुछ अनजाने से रिश्ते
कुछ पहचाने
कुछ अजनबी से लगे
समय के मेल से बने
पता नही कब तक
मन मे बसे रहे
पेड़ के सुखे पत्ते से
पत्तो से हल्के
पर पत्तर से भारी लगे
पेड़ जुदा करना चाहे
पर कर न पाऐ
किसी छोकें के इन्तजार में
आसमा को तकता रहे।

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तमन्ना

हर तमन्ना उठती है
इश्क की ताबीर से
बह जाती है
वक्त की रुखसाई से
विषक्त हो जाती है
जमाने की रुसवाई से
तीर्व है जो
आवेग से भरी
छा जाए धुआ बन
हस्ती पर मेरी
गरजते है बादल तब
लाज-हया के बन्धन
टकराते है जब

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मोती थी मैं

7bcc6be092d4e42b1e8d4da5d5f84c80मोती थी जब तक सिप में थी
डोलती, घुमती बस मदहोश थी
उस समुद्र ने फिर छोड़ दिया
अन्जाने किनारे को सोंप दिया
बस अब तो नाम ही है साथ
बाकी तो खुला है आकाश
पत्तरो में अपना वजुद खोजते है
इस दुनिया कि रंगीनी से डरते है
या तो कोई माला में पिरोऐगा
या हंस कोई चुग जाएगा।

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जुस्तजु

हँस हम भी लेते है जालिंम ,
जमाने को देखकर।
पर दर्दे-ए-दिल का आलम,
बया तन्हाईया ही करेगी।
जी रहे किस तरह
ओढ  लबादा-ए-दरोग़।
जुस्तजु-ए-दिल तो
बया खामोशियाँ ही करेगी॥