Poetry

मोहब्बत कम पड़ गई

चाहा उसे इतनी शिद्ददत से
कि चाहत कम पड़ गई
और वो कहते की हमारी
उल्फत-ए-मोहब्बत कम पड़ गई।

सूखी रही दिल की राहें
प्यासी रही दिले-ए-तमन्ना
और वो कहते है कि मैं
समुद्र-ए-मोहब्बत लुट गई।

खाक हो गई ये खाकसार
इज्हार-ए-महोब्बत में
और वो कहते है की हमारी
नमाज़-ए-मोहब्बत कम पड़ गई।

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Poetry

फुर्सत के दो पल

फुर्स्त के दो पल कुछ यूँ मिले
के एक पल मे ही गुजर दिये
सपने जो देखे मैनें
तेरी पलको मे सजा दिये
आज कुछ नगमे लिखे मैनें
जो तुझे आँखो से ही सुना दिये
जुस्तजु जो कैद थी इस सीने में
तुने अपने सीने में समा लिए
छलक उठे आँखो से कैद दरीया
और तूने उनहें भी मोती बना दिये
हमने फलक  पर तारे देखने की तमन्ना की
तूने अपने चाँद को देखने की गुजारिश की
बस फुर्सत के दो पल कुछ यूँ ही गुजार दिये।