Poetry

मोहब्बत कम पड़ गई

चाहा उसे इतनी शिद्ददत से
कि चाहत कम पड़ गई
और वो कहते की हमारी
उल्फत-ए-मोहब्बत कम पड़ गई।

सूखी रही दिल की राहें
प्यासी रही दिले-ए-तमन्ना
और वो कहते है कि मैं
समुद्र-ए-मोहब्बत लुट गई।

खाक हो गई ये खाकसार
इज्हार-ए-महोब्बत में
और वो कहते है की हमारी
नमाज़-ए-मोहब्बत कम पड़ गई।

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