Poetry

जिंदगी की इस घुप में

जिंदगी की इस घुप में
मैं  प्यासी रह गयी
दुनिया की दौड में
जैसे मैं पीछे रह गयी
सब कितने आगे और मैं
कितने पिछे रह गई
कोई मन में कोई धन में
मुझसे ऊपर निकल गये
छोटे भी अब उच्चें लगने लगे
बेबसी तो किस्से लगने लगे
कुछ प्यार तो बक्सा रब ने
पर कुछ तो उस में भी
पार निकल गये

Advertisements
Poetry

हमने कुछ खोया न होता

खुश वो भी थे
खुश हम भी थे
जब दिन वो हसीन थे
दिल हमने था लगाया
उसने दामन अपना बचाया
खुश वो आज भी हो शायद
खुश हम भी है शायद
पर ये शायद, शायद न होता
जो तुने यु मुहँ फेरा न होता
क्या मिला तुझे हमे लुट के
शायद तुझसे जुदा होकर
हमने कुछ खोया न होता।