Poetry

रात भी धोखा दे जाती है

हम बोला करते थे
दिन कभी साथ नही देता
रात कभी धोका नहीं देती
अब तो रात भी
धोखा दे जाती है
हमारी सोने से
पहले ही चली जाती है
दिन फिर चला आता है
एक नया इन्तेहां लेकर
कहता है कितना ढूंढेगी
ढूंढ कर देखा
रात कहती है
कितना जागेंगी
जाग कर देखा
अब तो आलम ये है
हर कोई तो इन्तेहां लेता है|

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Poetry

खामोश ही रहने दो

कहना तो बहुत कुछ है,
पर कह न सके |
ये लब है की,
तेरे सामने खुल न सके|
इन्हें खामोश ही रहने दो,
ये ही अच्छा है |

Poetry

तू यूँ खफा न होता

हँसते है हम
जब तू रोता है
पर हम हँसते है
क्यों की
तुम कहते थे
तुम हँसती हो तो
मैं सब गम भूल जाता हूँ
इतनी बात जान ली होती
तू यूँ खफा न होता