Poetry

मै कोई कवि नहीं

p.lozd.comमै कोई कवि नहीं और
ये सिर्फ़ कविता नहीं।
कुछ सार है जीवन के,
एक तार है मन का।
कुछ रस है जीवन के,
एक मस है मन का।
कुछ पल है जीवन के,
एक दर्द है मन का।
कुछ चाह है जीवन की,
एक आह है मन की।
कुछ दुविधा है जीवन की,
एक हल है मन का।
कुछ सोच है जीवन की,
एक मंथन है मन का।
कुछ ज्वाला है जीवन की,
एक सैलाब है मन का|
कुछ यादे है जीवन की,
एक अहसास है मन का।
बस कुछ,
यादो को संजोया है।
शब्दों को पिरोया है।।

Advertisements
Poetry

उठती है पिड़ा

उठती है पिड़ा
अपनी हसरतों की मय्यत पे
अरे! आलम तो देखो
रो भी नही सकते
टुटे ख्वाबो के मकान पे
जानते है हम की
जीती है दुनियां
इससे बुरे हालात में
फिर भी
तिल-तिल मरती हुँ
अपने हिजाब में।

Poetry

तुझे जो देखा इतने करीब से

तुझे जो देखा
इतने करीब से
लगा की जैसी
साँसे थम गयी।

अचानक रूबरू
हुई जो तुझसे
लगा की जैसे
धड़कन बढ़ गयी।

सुना जो मेरा नाम
तेरे जुबान से
लगा की जैसे
लहू जम गयी।

तुने जो बढ़ाया हाथ
एक मुबारक देने
लगा के जैसे
कायनात बदल गयी।