Poetry

चाहती हूँ..

तेरी सीने पे सर रख
इन तन्हाइयो को
भूलना कहती हूँ |
ले चल ऐ मुसाफिर
हमे भी तेरे साथ
उस राह पे
चलना चाहती हूँ |
मुझे थोड़े से
पर दे दे
ऐ ज़ालिम
उस आसमान को
मै भी
छूना चाहती हूँ |
किनारे पे बैठी हूँ
इस इश्क के
सैलाब में
डूबना चाहती हूँ |

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Poetry

बस अब तुम हो

तुम हो, तुम हो
बस अब तुम हो

हंसी तुम हो
खुशी तुम हो
मेरे दिल की
अब लगी तुम हो
लगी है ऐसी की
अब सुलझती नहीं है|

आसमा तुम हो
धरा तुम हो
मेरे दिल का
अब नशा तुम हो
नशा है ऐसा की
अब उतरता नहीं है|

तुम हो, तुम हो
बस अब तुम हो

खलिश तुम हो
कशिश तुम हो
मेरे दिल की
अब तपिश तुम हो
तपिश है ऐसी की
अब बुझती नहीं है|

अरज तुम हो
कर्ज तुम हो
मेरे दिल का
अब मर्ज तुम हो
मर्ज है ऐसा की
जिसके दवा नहीं है|

तुम हो, तुम हो
बस अब तुम हो…
बस अब तुम हो…

Poetry

तेरे इश्क़ मे

तेरे इश्क़ मे हम, लो से जल जाते है,
तेरे छूते ही हम, मोम से पिघल जाते है|
आता नहीं तुझे चाहने के अलावा अब हमें कुछ और,
तेरे इंतजार में हम, श्याम से ही जग जाते है|

Poetry

मान लिया हमे प्यार नहीं है

बरसो के इंतज़ार के बाद
ये नज़र आज
तुझ पर आकर रुकी है
बरसो से छुपि
दिल्लगी तुझ पर
आकर लगी है
और तुम कहती हो
ये प्यार नहीं है|

तमन्नाओं का सैलाब
छूट गया है
आँखो में एक ओर
ख़्वाब घूम गया है
तेरे आने के नाम से
दिल फिर झूम गया है
और तुम कहती हो
ये प्यार नहीं है|

बरसो से मन बसी
तस्वीर को आज
तेरा चेहरा मिला है
मेरे अरमानो को
तेरा पता मिला है
और तुम कहती हो
ये प्यार नहीं है|

माना लिया तुझे
एतबार नहीं है
मान लिया हमे
प्यार नहीं है
पर इन अहसासों को
यु बे पर्दा न कर
और यू कह-कर
मुँह फेरा न कर
की ये प्यार नहीं है|
की ये प्यार नहीं है|