Poetry

चाहती हूँ..

तेरी सीने पे सर रख
इन तन्हाइयो को
भूलना कहती हूँ |
ले चल ऐ मुसाफिर
हमे भी तेरे साथ
उस राह पे
चलना चाहती हूँ |
मुझे थोड़े से
पर दे दे
ऐ ज़ालिम
उस आसमान को
मै भी
छूना चाहती हूँ |
किनारे पे बैठी हूँ
इस इश्क के
सैलाब में
डूबना चाहती हूँ |

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s