Poetry

आज भी

चिलमन से वो
अाज भी छाक जाती है
उसके नाम से आँखे
आज भी नम हो जाती है
एक तिरझी मुस्कान से
किस्मत मुझे छेड़ जाती है
उसके नाम पे धड़कन
अाज भी थम जाती है
उसके नाम पे धड़कन
आज भी थम जाती है
उसकी बेवफाईयाँ ही अब
वफा कर जाती है
उस के नाम पर
आज भी साँसे रूक जाती है

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जुदा सा ये जहाँ

जुदा सा ये जहाँ
जुदा जुदा सी हर दिशा।
गुम है ये जुस्सत्जु
गुम गुम सा तेरा नशा।
सुना सा ये दिल
सुना सुना सारा मकां।
प्यासी है जमी
प्यासा प्यासा आशमा॥
खफा हुए जो तुम
खफा खफा सा ये शमा॥

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जिंदगी की इस घुप में

जिंदगी की इस घुप में
मैं  प्यासी रह गयी
दुनिया की दौड में
जैसे मैं पीछे रह गयी
सब कितने आगे और मैं
कितने पिछे रह गई
कोई मन में कोई धन में
मुझसे ऊपर निकल गये
छोटे भी अब उच्चें लगने लगे
बेबसी तो किस्से लगने लगे
कुछ प्यार तो बक्सा रब ने
पर कुछ तो उस में भी
पार निकल गये

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हमने कुछ खोया न होता

खुश वो भी थे
खुश हम भी थे
जब दिन वो हसीन थे
दिल हमने था लगाया
उसने दामन अपना बचाया
खुश वो आज भी हो शायद
खुश हम भी है शायद
पर ये शायद, शायद न होता
जो तुने यु मुहँ फेरा न होता
क्या मिला तुझे हमे लुट के
शायद तुझसे जुदा होकर
हमने कुछ खोया न होता।

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फुर्सत के दो पल

फुर्स्त के दो पल कुछ यूँ मिले
के एक पल मे ही गुजर दिये
सपने जो देखे मैनें
तेरी पलको मे सजा दिये
आज कुछ नगमे लिखे मैनें
जो तुझे आँखो से ही सुना दिये
जुस्तजु जो कैद थी इस सीने में
तुने अपने सीने में समा लिए
छलक उठे आँखो से कैद दरीया
और तूने उनहें भी मोती बना दिये
हमने फलक  पर तारे देखने की तमन्ना की
तूने अपने चाँद को देखने की गुजारिश की
बस फुर्सत के दो पल कुछ यूँ ही गुजार दिये।

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लम्हे

हर लम्हा नया रस लाता
जीवन का नया ही ताल सुनाता
जीवन में कितने रंग बिखरे
अहसास करा जाता
पर कुछ लम्हे निरस से रह जाते
कुछ अहसास नही होता
सब पास हो कर भी
कुछ पास नही होता
दोस्तो के बीच भी
तन्हाई घेर जाती है तब
दोस्त भी बेगाने और
दुश्मन भी अनजाने
नजर आते है तब।

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वो रिश्तें

जिन रिश्तों में
दिल का ख्वाब था
जिन्हें पाला-पोसा
सिचां हमने
वो आज बड़े हो
खुद चलने लगे है
सब कुछ
सिखाया था हमने
पीछे मुड़ने के सिवा
वो हमे आज
पिछे छोड़ चले है

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रिश्ते

कुछ अनजाने से रिश्ते
कुछ पहचाने
कुछ अजनबी से लगे
समय के मेल से बने
पता नही कब तक
मन मे बसे रहे
पेड़ के सुखे पत्ते से
पत्तो से हल्के
पर पत्तर से भारी लगे
पेड़ जुदा करना चाहे
पर कर न पाऐ
किसी छोकें के इन्तजार में
आसमा को तकता रहे।

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तमन्ना

हर तमन्ना उठती है
इश्क की ताबीर से
बह जाती है
वक्त की रुखसाई से
विषक्त हो जाती है
जमाने की रुसवाई से
तीर्व है जो
आवेग से भरी
छा जाए धुआ बन
हस्ती पर मेरी
गरजते है बादल तब
लाज-हया के बन्धन
टकराते है जब

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जुस्तजु

हँस हम भी लेते है जालिंम ,
जमाने को देखकर।
पर दर्दे-ए-दिल का आलम,
बया तन्हाईया ही करेगी।
जी रहे किस तरह
ओढ  लबादा-ए-दरोग़।
जुस्तजु-ए-दिल तो
बया खामोशियाँ ही करेगी॥

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दिन वो खो जाते है

दिन वो खो जाते है
पल न वो लोट पाते है
पुरानी तस्वीरो सी
बस वो यादें रह जाती है
यादों  पे कोहरा सा होता है
भुत पे वर्तमान का पेहरा होता है
ओर जब तु साथ होता है
वही जिन्दगी फिर
जीने का मन होता है
एक-एक पल फिर
जवा सा होता है
जब तु साथ होता है
पर दिन वो खो जाते है
पल न वो लोट पाते है

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इबादत कि कस्म

फिर मिलना था शायद
ये ऎसा ही लिखा था
उलछने सुलछेगी
ऎसा न सोचा था
चाहा था तुझे
जिस शिद्दत से
उस इबादत कि कस्म
तुझे पाने का
तब भी न सोचा था
तेरी खुशी में
खुशी ढूंढी मैने
इससे ज्यादा मेरा
कोई इरादा न था
आज मिल कर
फिर चले जाये शायद
पर तुझे तन्हा देखने का
ये बहाना न था

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जवाब

हम वहीं है जहाँ तब थे खड़े
तुम ही पास से गुजर गये
एक बार मिलने कि दुआ
माँगी उस रब से ओर
तुम्हारे रास्ते इधर से निकल गये
दोश न देना तुम हमे
हम ऎसा न चाहते थे
ढूंढे जो जवाब बरसो
वो हमे अब मिल गये
गिला न होगा
चाहे भुला भी देना
अब  तुम हमें|

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होती नही बारीशे

बहुतो ने कि खुहासे
बहुतो ने कि फरमाइशें
क्या पता किसे मिल जाए
हमारी चाहते
जाने कब हो जाये
प्यार कि बारीशे |
सोते रहे जाग कर भी
हँसते रहे सब जान कर भी,
हमे मिला इसका सिला
तालाब अब ये सुखा पड़ा
यहाँ होती नही बारीशे
मोर के नाचने कि फरमाइशें।

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जिंदगी

जिंदगी ओर कहाँ ले जाएगी
यहाँ लाने के बाद
ओर कितना सताएगी
इतना रुलाने के बाद
लगता है…
इसको बनाने वाला भी नही जानता
क्या चहाता है
मेरी जिंदगी के साथ
रास्तो को दिखाता है
कई तुफानो के बाद
अचानक नया मोड ले आता है
एक ठेराओ के बाद