Poetry

नींद आती नहीं

वो तब भी कुछ ओर थे,
ओर अब भी कुछ ओर है।
वो हमे जाने नहीं,
ओर हम उन्हे पहचाने नहीं।

बढ़ाते रहें कुछ इस तरह,
हम जिन्दगी का सफर।
जिसमे उसने कुछ खोया नहीं,
ओर हमने कुछ पाया नहीं।

भरी उड़ान हमने भी,
उस पंछी की तरह।
उसने कोई राह सोची नहीं,
ओर हम कहीं पहोचे नहीं।

दर्द कि आवाज पहुँच जाए,
पत्तर का सीना भी चिर कर।
पर उसने कुछ सुना नहीं,
ओर हमने कुछ कहा नहीं।

देखेगे ख्वाब हम भी,
नुर-ऐ-परछाई का।
पर उसकी नींद जाती नहीं,
ओर हमे नींद आती नहीं।

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