Poetry

तू नहीं तो तेरे याद सही

la_con10कोई पल कोई दिन ऐसा नहीं
जब तेरे लिए सोचा नहीं
जिस दिन तेरा दीदार नहीं
उस दिन नींद दुश्वार नहीं|

तू साथ नहीं तेरा नाम सही
तेरे दीदार का हर पल इंतजार सही
हम होश मे नहीं ऐसे बदहाल सही
बिन पिंजरे की तेरी कैद सही|

कोई ख्वाब अब तेरे बिन साथ नहीं
तेरे आने की आहट पर मदहाल सही
तू नहीं तो तेरे याद सही|
तू नहीं तो तेरे याद सही|

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तू यूँ खफा न होता

हँसते है हम
जब तू रोता है
पर हम हँसते है
क्यों की
तुम कहते थे
तुम हँसती हो तो
मैं सब गम भूल जाता हूँ
इतनी बात जान ली होती
तू यूँ खफा न होता

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जुदा सा ये जहाँ

जुदा सा ये जहाँ
जुदा जुदा सी हर दिशा।
गुम है ये जुस्सत्जु
गुम गुम सा तेरा नशा।
सुना सा ये दिल
सुना सुना सारा मकां।
प्यासी है जमी
प्यासा प्यासा आशमा॥
खफा हुए जो तुम
खफा खफा सा ये शमा॥

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मोहब्बत कम पड़ गई

चाहा उसे इतनी शिद्ददत से
कि चाहत कम पड़ गई
और वो कहते की हमारी
उल्फत-ए-मोहब्बत कम पड़ गई।

सूखी रही दिल की राहें
प्यासी रही दिले-ए-तमन्ना
और वो कहते है कि मैं
समुद्र-ए-मोहब्बत लुट गई।

खाक हो गई ये खाकसार
इज्हार-ए-महोब्बत में
और वो कहते है की हमारी
नमाज़-ए-मोहब्बत कम पड़ गई।